प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन के अनुरूप देश में एक आधुनिक और वाइब्रेंट सिविल डिफेंस नेटवर्क के निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है। 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर से दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री ने आधुनिक प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित सिविल डिफेंस नेटवर्क बनाने की बात कही थी। इसी कड़ी में गृह मंत्रालय के अग्निशमन सेवा, सिविल डिफेंस एवं गृह रक्षक महानिदेशालय (DGFSCDHG) द्वारा भारतीय सेना के साथ मिलकर यह अपनी तरह की पहली संयुक्त पायलट पहल शुरू की गई है। इस पहल का उद्देश्य देश के नागरिकों और सिविल डिफेंस कर्मियों को उभरती सुरक्षा चुनौतियों व आपात स्थितियों के लिए पूरी तरह तैयार करना है।
किन राज्यों और क्षेत्रों में होगी शुरुआत
इस योजना के पहले चरण के तहत देश के 12 चुनिंदा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जिन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को पहले चरण में शामिल किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- जम्मू एवं कश्मीर
- पंजाब
- राजस्थान
- गुजरात
- दिल्ली
- मेघालय
- सिक्किम
- असम
- उत्तर प्रदेश
- केरल
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
प्रशिक्षण का स्वरूप और मास्टर ट्रेनर मॉडल
पहले चरण में भाग लेने वाले प्रत्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश से 50 मास्टर ट्रेनर्स का चयन किया जाएगा। इस प्रकार कुल 600 सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स को नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है। यह तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण भारतीय सेना के नामित प्रशिक्षण संस्थानों में दिया जाएगा। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘स्ट्रक्चर्ड मास्टर ट्रेनर मॉडल’ है, जिसके तहत मल्टीप्लायर इफेक्ट काम करेगा। विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में वापस जाकर 100 सिविल डिफेंस वॉलन्टियर्स को आगे प्रशिक्षित करेगा। इस तरह इस क्रमिक तंत्र के माध्यम से कुल 60,000 सिविल डिफेंस वॉलन्टियर्स तक विशेष तैयारी कौशल का विस्तार किया जाएगा।
प्रशिक्षण में किन मुख्य विषयों को किया जाएगा कवर
सिविल डिफेंस कर्मियों और वॉलन्टियर्स को समकालीन सुरक्षा खतरों, शत्रुतापूर्ण स्थितियों और किसी भी आपात स्थिति का डटकर मुकाबला करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जाएगा। यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से तीन व्यापक क्षेत्रों को कवर करेगा:
- खतरे के प्रति जागरूकता (Threat Awareness): इसमें आधुनिक और हाइब्रिड युद्ध, ड्रोन जागरूकता तथा हवाई हमले के खतरों की जानकारी दी जाएगी।
- सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया (Protection and Emergency Response): इसके अंतर्गत महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) जागरूकता, कैजुअल्टी मैनेजमेंट, तथा खोज और बचाव कार्य सिखाए जाएंगे।
- संचार और समन्वय (Communication and Coordination): इसमें आपातकालीन संचार, साइबर स्वच्छता, डिजिटल लचीलापन, नागरिक-सैन्य समन्वय और इंसिडेंट कमांड जैसे विषय शामिल हैं।
मुख्य बिंदु
- पहल का उद्देश्य: समकालीन सुरक्षा खतरों और आपात स्थितियों से निपटने के लिए वाइब्रेंट सिविल डिफेंस नेटवर्क तैयार करना।
- साझेदारी: गृह मंत्रालय और भारतीय सेना के बीच संयुक्त प्रयास।
- प्रशिक्षण अवधि: मास्टर ट्रेनर्स के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण।
- लक्ष्य: नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक 600 मास्टर ट्रेनर्स और बाद में 60,000 वॉलन्टियर्स को प्रशिक्षित करना।
- विस्तार: पायलट चरण के परिणामों के आधार पर इसे देश के अन्य शेष राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1: इस वाइब्रेंट सिविल डिफेंस नेटवर्क पहल की शुरुआत किसके विजन के तहत की जा रही है?
A1: यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन के अनुरूप शुरू की गई है, जिसकी घोषणा उन्होंने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से की थी।
Q2: पहले चरण में कितने मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है और कब तक?
A2: पहले चरण में कुल 600 सिविल डिफेंस मास्टर ट्रेनर्स (प्रत्येक 12 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों से 50) को नवंबर 2026 के दूसरे सप्ताह तक प्रशिक्षित करने का प्रस्ताव है।
Q3: प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मास्टर ट्रेनर्स क्या करेंगे?
A3: विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रत्येक मास्टर ट्रेनर अपने संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में 100 सिविल डिफेंस वॉलन्टियर्स को प्रशिक्षित करेगा, जिससे कुल 60,000 वॉलन्टियर्स तैयार हो सकेंगे।
आधिकारिक स्रोत: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विजन के अनुरूप देश में वाइब्रेंट सिविल डिफेंस नेटवर्क के निर्माण का कार्य शुरू होने जा रहा है