विकसित भारत-जी राम जी योजना: अब ग्रामीण परिवारों को मिलेगा 125 दिन का गारंटीशुदा रोजगार

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के लिए केंद्र सरकार ने रोजगार और आजीविका का नया ढांचा लागू किया है। ‘विकसित भारत – रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ यानी वीबी-जी राम जी (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 को 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के ग्रामीण इलाकों में लागू कर दिया गया है। यह व्यवस्था महात्मा गांधी नरेगा के स्थान पर बिना किसी रुकावट के पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के साथ शुरू की गई है। इस नए कानून के तहत अब ग्रामीण परिवारों को हर वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी दी जा रही है।

वीबी-जी राम जी मिशन के मुख्य लाभ और मजदूरी

इस नई व्यवस्था का सीधा लाभ उन सभी ग्रामीण परिवारों को मिलेगा जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम करने के लिए खुद आगे आते हैं। योजना से जुड़े मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:

  • 125 दिनों का गारंटीशुदा काम: प्रत्येक वित्तीय वर्ष में पात्र ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा।
  • दैनिक मजदूरी दर: योजना के तहत कामगारों को 300 रुपये से लेकर 450 रुपये प्रतिदिन की औसत मजदूरी दर मिल रही है।
  • सीधे बैंक खाते में भुगतान: सभी श्रमिकों की मजदूरी का भुगतान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाता है।
  • महिलाओं की मजबूत भागीदारी: वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक इस मिशन में महिलाओं की भागीदारी 61.65 प्रतिशत दर्ज की गई है।

चार प्रमुख क्षेत्रों और 318 प्रकार के कार्यों पर जोर

वीबी-जी राम जी के अंतर्गत केवल गड्ढे खोदने तक काम सीमित नहीं है, बल्कि गांवों के टिकाऊ विकास के लिए 318 तरह के कार्यों को मंजूरी दी गई है। यह मिशन मुख्य रूप से चार प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित है:

  • जल सुरक्षा: जल संरक्षण, तालाबों का निर्माण और भूजल स्तर सुधारने से जुड़े कार्य।
  • बुनियादी ग्रामीण अवसंरचना: गांवों के भीतर संपर्क मार्ग और आवश्यक ढांचागत निर्माण।
  • आजीविका से जुड़ी अवसंरचना: पशु शेड, कृषि आधारित कार्य और ग्रामीणों की कमाई बढ़ाने वाले साधन।
  • खराब मौसम से बचाव: बाढ़, सूखे और जलवायु परिवर्तन के असर से निपटने के सुरक्षात्मक उपाय।

विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं (वीजीपीपी) कैसे करती हैं काम?

इस मिशन की सबसे बड़ी विशेषता ‘विकसित ग्राम पंचायत योजनाएं’ (VGPP) हैं। अब विकास की योजनाएं ऊपर से थोपने के बजाय गांव के लोग खुद तय कर रहे हैं:

  • भागीदारी वाली प्लानिंग: ग्राम पंचायतें अपनी ग्राम सभा की बैठक में स्थानीय जरूरतों की पहचान करती हैं और प्राथमिकता तय करती हैं।
  • एसेट मैपिंग: गांव में पहले से मौजूद संपत्तियों और सुविधाओं की कमियों का पूरा ब्यौरा तैयार किया जाता है।
  • डिजिटल तकनीक का उपयोग: योजनाओं को अंतिम रूप देने में जीआईएस (GIS), युक्तधारा और पीएम गति शक्ति जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मदद ली जाती है ताकि किसी काम का दोहराव न हो।
  • निचले स्तर से मंजूरी: ग्राम सभा की सिफारिश और मंजूरी मिलने के बाद ही योजनाओं को ब्लॉक, जिला और राज्य स्तर से जोड़ा जाता है।

पारदर्शिता और तकनीकी निगरानी

योजना में फर्जीवाड़े को रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। श्रमिकों का सत्यापन e-KYC, फेस ऑथेंटिकेशन और बायोमेट्रिक के जरिए किया जाता है। कार्यस्थल पर उपस्थिति डिजिटल रूप से दर्ज होती है। इसके अलावा, कामों की जियो-टैगिंग, इलेक्ट्रॉनिक मेजरमेंट बुक्स (e-MB) और रियल-टाइम डैशबोर्ड के जरिए हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है। देश भर में अब तक 15.17 करोड़ ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी किए जा चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. वीबी-जी राम जी योजना में कितने दिनों का काम मिलता है?

इस कानून के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के सवेतन अकुशल रोजगार की कानूनी गारंटी दी जाती है।

2. योजना के तहत कितनी मजदूरी मिलती है और भुगतान कैसे होता है?

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार औसत मजदूरी दर 300 से 450 रुपये प्रतिदिन है। मजदूरी का भुगतान सीधे श्रमिक के बैंक खाते में डीबीटी (DBT) के जरिए किया जाता है।

3. गांव में कौन से काम करवाए जाएंगे, यह कौन तय करता है?

गांव के विकास कार्य ‘विकसित ग्राम पंचायत योजना’ (VGPP) के तहत तय होते हैं। ग्राम सभा और ग्राम पंचायत मिलकर स्थानीय जरूरतों के आधार पर कार्यों की सूची बनाती हैं और उन्हें मंजूरी देती हैं।

आधिकारिक स्रोत: विकसित भारत- जी राम जी